आय और आवक के आधार पर चार श्रेणियों में बांटी गईं मंडियां, संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने जताया आभार
नेपा दर्पण प्रतिनिधि।
मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड भोपाल द्वारा प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों का पुनर्वर्गीकरण किया गया है। संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित के अनुसार मंडियों की पिछले तीन वर्षों की आय और आवक के आधार पर उन्हें चार श्रेणियों—क, ख, ग और घ—में वर्गीकृत किया गया है।
47 मंडियां ‘क’ और 63 मंडियां ‘ख’ श्रेणी में
दीक्षित ने बताया कि निर्धारित मानकों के अनुसार क श्रेणी में 47 मंडियों, ख श्रेणी में 63 मंडियों, ग श्रेणी में 68 मंडियों तथा घ श्रेणी में 81 मंडियों को शामिल किया गया है। इस प्रकार प्रदेश की कुल 259 कृषि उपज मंडियों का वर्गीकरण किया गया है।यह वर्गीकरण मध्य प्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 तथा मध्य प्रदेश कृषि उपज मंडी समिति वर्गीकरण नियम, 1981 के प्रावधानों और निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया है।
अमला और पद बढ़ने की उम्मीद
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संयोजक फौजदार साहब ने कहा कि मंडियों के वर्गीकरण से आने वाले समय में मंडियों का अमला बढ़ने, नए पद सृजित होने और कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलने की संभावना है। इससे कर्मचारियों पर वर्तमान कार्यभार भी कम हो सकेगा।मोर्चा ने उम्मीद जताई कि प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम द्वारा आगामी समय में आवश्यक पद सृजित किए जाएंगे, जिससे विशेष रूप से ग और घ श्रेणी की मंडियों के कर्मचारियों को भी पदोन्नति के अवसर मिल सकेंगे।
आमेलन की लंबित मांग भी जल्द पूरी करने की अपील
संघर्ष मोर्चा ने मंडी कर्मचारियों की लंबित आमेलन संबंधी मांग पर भी शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की शेष मांगों पर भी सकारात्मक कार्रवाई होने की उम्मीद है।मोर्चा के पदाधिकारी अंगिरा प्रसाद पांडे, नैन सिंह सोलंकी, रामवीर सिंह किरार, वीरेंद्र नरवरिया, दिलीप सिंह ठाकुर, योगेश बर्वे, भारत सिंह और प्रदीप शर्मा सहित प्रदेशभर के कर्मचारियों ने मंडियों के वर्गीकरण के फैसले का स्वागत किया है।




