खकनार जनपद की साधारण सभा में प्रतिनिधियों की एंट्री पर विवाद, 25 सदस्यों ने किया बहिष्कार; सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी

प्रतिनिधियों को बैठक में अपेक्षित नहीं किए जाने से नाराज हुए निर्वाचित सदस्य, सीईओ से समझाइश के बाद भी नहीं बनी बात; विकास कार्यों को लेकर भी जताई नाराजगी

नेपा दर्पण प्रतिनिधि।

खकनार जनपद पंचायत की साधारण सभा की बैठक शनिवार को विकास के मुद्दों पर चर्चा शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई। बैठक के लिए जारी पत्र में निर्वाचित जनपद सदस्यों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन उनके प्रतिनिधियों को बैठक के लिए अपेक्षित नहीं किया गया था। इसी मुद्दे को लेकर जनपद पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में सदस्यों ने नाराजगी जताई और बैठक का बहिष्कार कर दिया। जानकारी के अनुसार, करीब 25 निर्वाचित जनपद सदस्यों ने साधारण सभा की बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। सदस्यों का कहना था कि प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल नहीं किए जाने को लेकर पहले स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। मामला बढ़ने पर जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सुनीता बघेल ने सदस्यों से चर्चा कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन सदस्य अपनी मांग और नाराजगी पर कायम रहे।

पत्र में प्रतिनिधियों को अपेक्षित नहीं किए जाने पर शुरू हुआ विवाद

साधारण सभा शुरू होने से पहले ही सदस्यों के सामने बैठक के लिए जारी पत्र का मुद्दा आ गया। पत्र में निर्वाचित जनपद सदस्यों को बैठक में शामिल होने के लिए सूचना दी गई थी, जबकि उनके प्रतिनिधियों का उल्लेख नहीं था। यही बात बैठक में विवाद की मुख्य वजह बनी। सदस्यों ने प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल किए जाने की मांग को लेकर विरोध जताया और बैठक में जाने से इनकार कर दिया। वहीं, सीईओ सुनीता बघेल का कहना था कि साधारण सभा की बैठक के लिए नियमानुसार निर्वाचित जनपद सदस्यों को सूचना दी गई थी और प्रतिनिधियों को अपेक्षित नहीं किया गया था। उन्होंने सदस्यों से चर्चा कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।

समझाइश के बाद भी सदस्यों ने नहीं लिया बैठक में हिस्सा

सीईओ और जनपद सदस्यों के बीच बातचीत के बावजूद विवाद का समाधान नहीं हो सका। सदस्य बैठक में शामिल नहीं हुए और बहिष्कार जारी रखा। इसके बाद सीईओ सुनीता बघेल वहां से अपने निवास के लिए रवाना हो गईं। उनके जाने के बाद जनपद पंचायत अध्यक्ष राकेश सोलंकी, उपाध्यक्ष आरती दिनेश चौकसे सहित सदस्य कार्यालय के सामने एकत्रित हुए।

प्रतिनिधियों का मुद्दा बढ़कर विकास कार्यों तक पहुंचा

शुरुआत में विवाद प्रतिनिधियों की बैठक में मौजूदगी को लेकर था, लेकिन विरोध के दौरान सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों का मुद्दा भी उठाया।सदस्यों का आरोप था कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। उनका कहना था कि क्षेत्र की जनता निर्वाचित प्रतिनिधियों से विकास कार्यों को लेकर सवाल करती है, लेकिन समय पर काम नहीं होने के कारण उन्हें जवाब देने में परेशानी होती है।

विकास कार्य शुरू नहीं हुए तो सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी

विरोध कर रहे जनपद सदस्यों ने प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी भी दी। सदस्यों का कहना है कि यदि उनके क्षेत्रों में जल्द विकास कार्य शुरू नहीं किए गए तो वे कलेक्टर के समक्ष पहुंचकर सामूहिक इस्तीफा देने का कदम उठाएंगे। कुछ देर तक जनपद कार्यालय के सामने नारेबाजी और विरोध के बाद सदस्य वहां से लौट गए। हालांकि, सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी के बाद अब इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन और जनपद पंचायत के स्तर पर आगे की स्थिति पर नजर रहेगी।

प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर उठे सवाल

पूरे विवाद में अब प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी सवाल सामने आया है। साधारण सभा निर्वाचित जनपद सदस्यों की होती है और सीईओ का कहना है कि बैठक के लिए नियमानुसार निर्वाचित सदस्यों को ही सूचना दी गई थी। दूसरी ओर, बड़ी संख्या में निर्वाचित सदस्य प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल किए जाने के मुद्दे पर अड़े रहे और उन्होंने बैठक का बहिष्कार किया। ऐसे में अब यह सवाल महत्वपूर्ण है कि जनपद सदस्य प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल करने पर क्यों जोर दे रहे थे और पूर्व की बैठकों में प्रतिनिधियों की मौजूदगी को लेकर क्या व्यवस्था रही है। इस संबंध में स्पष्ट स्थिति सामने आने के बाद विवाद की तस्वीर और साफ हो सकती है।

अध्यक्ष-उपाध्यक्ष सहित करीब 25 सदस्य रहे विरोध में

विरोध करने वाले सदस्यों में जनपद पंचायत अध्यक्ष राकेश सोलंकी, उपाध्यक्ष आरती दिनेश चौकसे सहित करीब 25 सदस्य शामिल बताए गए हैं। इनमें रितु संजय, रायसिंह अनारसिंह भूरिया, कविता सुरेश पवार, शारदा रायसिंह, शिवलाल देवतराम भिलावेकर, देविदास किसन जामबेकर, पुष्पा भीमसिंह, सुमन हरिराम पटेल, नंदकिशोर पन्नालाल, शर्मिला पूनमचंद कारडेकर, मीराबाई गणेश भिलावेकर, सुनीता शांताराम, गजाधर बेडिया, कोटारानी बाई ईग्राम, कमला हरी, हरी धर्मा राठौड़, सुभाष शिवकुमार परिहार, शंकर मेहरचंद, ज्योति सालिकराम पाटील, समोती मंगल, गणेश सुपरकिंग, गोकुल रामदास पाटील और मनीषा विजय चौधरी सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।

सीईओ का पक्ष

जनपद पंचायत खकनार की सीईओ सुनीता बघेल के अनुसार, साधारण सभा की बैठक के लिए नियमानुसार पत्र जारी कर निर्वाचित जनपद सदस्यों को सूचना दी गई थी। पत्र में सदस्यों के प्रतिनिधियों को अपेक्षित नहीं किया गया था। उन्होंने सदस्यों से चर्चा कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन सदस्य बैठक में शामिल होने के लिए सहमत नहीं हुए।

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