महिलाओं की आजीविका के लिए आई राशि में 38.93 लाख की गड़बड़ी का आरोप, रूद्र सीएलएफ के चार पदाधिकारियों पर FIR

बिना प्रक्रिया पूरी किए निजी खातों में पहुंचाई गई रकम का आरोप, निंबोला पुलिस कर रही बैंक लेन-देन की जांच

नेपा दर्पण प्रतिनिधि।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से भेजी गई सरकारी सहायता राशि में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। रूद्र संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ), धुलकोट के पदाधिकारियों पर 38 लाख 93 हजार 250 रुपए की सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगा है। मामले में निंबोला थाना पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने यह कार्रवाई मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की परियोजना प्रबंधक संतमती खलखो की शिकायत पर की है। आरोपियों में संगठन की अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष सहित एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं। मामले की जांच कार्यवाहक उपनिरीक्षक कमल मोरे को सौंपी गई है।

चार पदाधिकारियों पर दर्ज हुआ मामला

पुलिस के अनुसार रूद्र सीएलएफ की अध्यक्ष लाली बाई पति माधो, सचिव रानी बाई पति आशीष गाठे, कोषाध्यक्ष काली बाई पति लक्ष्मीनारायण और आशीष गाठे पिता मांगीलाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(2), 316(5) और 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

संगठन के पदाधिकारियों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना सरकारी राशि का भुगतान किया और रकम को कथित तौर पर निजी खातों तक पहुंचाया।

नियमों को दरकिनार कर भुगतान

आजीविका मिशन के नियमों के अनुसार संकुल संगठन के खाते से राशि संबंधित समूहों को दी जाती है। इसके बाद समूह की बैठक, प्रस्ताव और पात्रता जांच के बाद पात्र महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराया जाता है।

जांच में पाया गया है कि रूद्र सीएलएफ में इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। समूह की बैठक और प्रस्ताव के बिना ही कुछ व्यक्तियों के खातों में राशि पहुंचाई गई।

पात्रता से अधिक राशि देने का मामला

जांच के दौरान एक ऐसा मामला भी सामने आया जिसमें एक महिला सदस्य को 10 हजार रुपए की पात्रता होने के बावजूद एक लाख रुपए का भुगतान किए गए है।

जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि संगठन के पदाधिकारियों ने चेक के माध्यम से आपस में लाखों रुपए का लेन-देन किया। इसके बाद बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेजों की जांच में वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई।

महिलाओं ने लगाए दबाव बनाकर राशि लेने के आरोप

जांच के दौरान कुछ महिलाओं के बयान भी दर्ज किए गए। महिलाओं ने आरोप लगाया कि आशीष गाठे द्वारा दबाव बनाकर नकद, चेक और फोन-पे के माध्यम से कुल 1 लाख 71 हजार रुपए लिए गए।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि यह राशि किन परिस्थितियों में ली गई और सरकारी सहायता राशि के लेन-देन में इसकी क्या भूमिका रही।

पुलिस खंगाल रही बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजेक्शन

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस संगठन के बैंक खाते, भुगतान में इस्तेमाल हुए चेक, फोन-पे ट्रांजेक्शन और नकद लेन-देन की जांच कर रही है।

जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि सरकारी राशि किन खातों में पहुंची और उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया गया। पुलिस डिजिटल और बैंक रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है।

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